भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में घर के साथ चूल्हे-बर्तन और खेती के औजार भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं। जीवनशैली की दीर्घा में मिट्टी, बांस, घास और दूसरे स्थानीय पदार्थों से बने आवास दिखाते हैं कि घर, काम और आसपास की प्रकृति आपस में कैसे जुड़े हैं।

मध्यप्रदेश पर्यटन के विवरण के अनुसार, संग्रहालय गोंड, भील, कोरकू, बैगा, सहरिया, कोल और भारिया समुदायों की परंपराओं को सामने लाता है। यहां विवाह मंडप, संगीत वाद्य, लोककथाओं की आकृतियां और देवस्थानों की कल्पनाएं अलग-अलग दीर्घाओं में आकार लेती हैं।

इमारत भी प्रदर्शनी का हिस्सा है

वास्तुकार रेवती कामथ के स्टूडियो का परियोजना विवरण बताता है कि जमीन की प्राकृतिक ढलान के साथ दीर्घाएं खंभों पर उठाई गई हैं। इनके बीच बरामदे और आंगन बनाए गए, ताकि परिसर में हवा और रोशनी आती रहे। डिजाइन में जनजातीय कारीगरों की अभिव्यक्ति के लिए जगह रखने का विचार केंद्रीय था।

दीवारों में स्थानीय पत्थर, ईंट और मिट्टी के प्लास्टर का इस्तेमाल हुआ है। छतों के कुछ हिस्सों पर घास और वनस्पति है। परिसर में बारिश का पानी इकट्ठा कर उसे हरियाली की सिंचाई और ठंडक के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था भी डिजाइन का हिस्सा है।

जाने से पहले समय देख लें

संग्रहालय की अपनी वेबसाइट पर फरवरी से अक्टूबर 2026 के लिए दोपहर 12 से रात 8 बजे तक खुलने की सूचना है। सोमवार और राष्ट्रीय अवकाश पर संग्रहालय बंद रहता है। भारतीय दर्शकों के लिए 10 वर्ष और उससे अधिक आयु पर प्रवेश शुल्क 20 रुपये दर्ज है।

यह जानकारी 15 सितंबर को आधिकारिक वेबसाइट से जांची गई है। कार्यक्रम, विशेष बंदी और प्रवेश संबंधी नई सूचना संग्रहालय के पन्ने पर देखी जा सकती है। परिसर में हस्तशिल्प की दुकान ‘चिन्हारी’ भी है।

मुख्य बातें

  • सात प्रमुख जनजातीय समुदायों के जीवन और कलाओं की प्रस्तुति।
  • ढलान, आंगन और स्थानीय सामग्री से जुड़ी इमारत की डिजाइन।
  • अक्टूबर 2026 तक घोषित समय: दोपहर 12–रात 8; सोमवार बंद।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्यप्रदेश पर्यटन · MP Tribal Museum, Bhopal ↗14 जून 2020
  2. Kamath Design Studio · Tribal Museum — वास्तु परियोजना ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय · आधिकारिक सूचना, दीर्घाएं और समय ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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