अपनी संस्कृति • भोपाल
भोपाल का जनजातीय संग्रहालय: यहां घर, लोककथा और वास्तुकला साथ दिखते हैं
सात जनजातीय समुदायों के जीवन और कला को समझने की जगह। इसके आंगन, ढलान के साथ उठती दीर्घाएं और बारिश का पानी सहेजता परिसर भी कहानी का हिस्सा हैं।
सात जनजातीय समुदायों के जीवन और कला को समझने की जगह। इसके आंगन, ढलान के साथ उठती दीर्घाएं और बारिश का पानी सहेजता परिसर भी कहानी का हिस्सा हैं।
महीन बुनावट की पहचान उसके बॉर्डर और पल्लू में भी है। महेश्वर की वास्तुकला से निकले रूपांकन और शाही संरक्षण से बाजार तक पहुंचने की कहानी।
महल, बाग और धार्मिक परिसर मिलकर ओरछा की पहचान बनाते हैं। UNESCO की संभावित धरोहर सूची में दर्ज विवरण इसके इतिहास और नगर-योजना को समझाता है।