1970 तक कान्हा में हार्ड ग्राउंड बारहसिंगा की संख्या सिर्फ 66 रह गई थी। एक समय यह उपप्रजाति खत्म होने के बेहद करीब थी। कान्हा टाइगर रिजर्व के संरक्षण विवरण में इसके बाद करीब पांच दशकों में कोर क्षेत्र की आबादी लगभग 1,050 तक पहुंचने का उल्लेख है। यह ऐतिहासिक विवरण है, 2026 की नई गणना नहीं।
इस वापसी के पीछे केवल जानवरों की सुरक्षा नहीं, उनके रहने और खाने की जगह बचाने का काम भी था। हार्ड ग्राउंड बारहसिंगा घास के मैदानों पर निर्भर हैं। कान्हा प्रबंधन के मुताबिक, इन मैदानों में लैंटाना, दूसरी खरपतवार और घुसते पेड़ों को हटाना आवास प्रबंधन का हिस्सा रहा है।
एक ही जंगल में पूरी आबादी रखना जोखिम था
संख्या बढ़ने के बाद अगली चुनौती थी कि किसी महामारी से पूरी छोटी आबादी प्रभावित न हो जाए। प्रबंधन ने पहले कुछ बारहसिंगा भोपाल के वन विहार और फिर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बसाने की योजना बनाई। दोनों जगह इनके अनुकूल आवास वाले विशेष बाड़े तैयार किए गए।
जानवरों को पकड़ने के लिए बोमा पद्धति अपनाई गई। इसमें दवा देकर बेहोश करने के बजाय बाड़े और रास्ते की बनावट से उन्हें नियंत्रित दिशा में लाया गया। 15–20 बारहसिंगा ले जा सकने वाला ट्रक बनाया गया। ट्रक तक जाने वाली ढलान पर मिट्टी और घास लगाई गई, ताकि रास्ता प्राकृतिक लगे।
85 बारहसिंगा पहुंचे दूसरे ठिकानों पर
कान्हा के अभिलेख में जनवरी 2015 से फरवरी 2022 के बीच 85 बारहसिंगा भेजे जाने का विवरण है। इनमें सात वन विहार और 78 सतपुड़ा पहुंचे। प्रबंधन के अनुसार, इन अभियानों में किसी जानवर की मृत्यु नहीं हुई।
यह संरक्षण की उस दूसरी मंजिल की कहानी है जिसमें प्रजाति की संख्या बढ़ने के बाद उसके लिए अलग सुरक्षित ठिकाने बनाए जाते हैं। कान्हा में घास के मैदानों की देखभाल और नई जगह आबादी बसाने का काम इसी लंबे प्रयास के दो हिस्से हैं।
मुख्य बातें
- 1970 तक कान्हा में संख्या घटकर 66 रह गई थी।
- बारहसिंगा के लिए घास के मैदानों का प्रबंधन जरूरी है।
- 2015–22 में 85 बारहसिंगा वन विहार और सतपुड़ा भेजे गए।
स्रोत और संदर्भ
- कान्हा टाइगर रिजर्व · Barasingha Conservation ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- कान्हा टाइगर रिजर्व · Habitat Management ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- कान्हा टाइगर रिजर्व · Active Management ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।


